सोमवार, 18 अक्टूबर 2010

मेरी कहानी (बतीसवां भाग)

दो हजार नौ में मेरा गढ़वाल जाने का चक्कर लगता रहा ! इस बीच मैं ढून्ढूभी नामक साप्ताहिक पत्रिका से जुड़ गया ! मेरे ममेरे भाई स्वर्गीय श्री भूपेन्द्रसिंह जी ने "ठहरो" नामक साप्ताहिक पेपर निकाला था ! जब तक वे रहे नियमित तौर पर यह पेपर चलता रहा ! उनके बाद इस पेपर की बागडोर इनके सुपुत्र सुधीन्द्र नेगी ने संभाली ! अब इस का नाम ठहरो से ढून्ढूभी रख दिया गया है ! यह साप्ताहिकी ज्यादातर जंगल और प्रयावरण से समबन्ध रखने वाले लेख, कवितायेँ, सस्मरण को ही ज्यादा तबजो देती है ! इन्हीं दिनों इस पेपर के माध्यम से सुधीन्द्र नेगी ने एक स्मारिका निकाली और उसके विमोचन के शुभ अवसर पर मैं और मेरा बेटा ब्रिजेश भी वहां झिन्डी चौड़ में मौजूद थे ! स्मारिका का विमोचन श्री रावत जी (चीफ कन्सर्वेटर) के कर कमलों से संमापन हुआ ! इस समारोह में बहुत सारे पुराने नए लोगों से भी मुलाक़ात हुई !
काफी सालों बाद मैंने दिल्ली में १५ अगस्त, दिवाली, दशहेरा परिवार के साथ मनाया ! आम खूब खाए और मकई वह भी ताजी ताजी भूनी हुई का स्वाद लिया ! झिन्डी चौड़ जहाँ सन १९५४ तक बिलकुल जंगल था और गढ़वाल के उन लोगों को जिनके पास जमीन नहीं थी उन्हें यह जमीन बांटी गयी थी प्रांतीय सरकार की ओर से ! उन दिनों मेरे मामा गोकुलसिंह जी अपने परिवार के साथ यहाँ जंगल में आये थे ! और आज मामा जी की तीसरी पीढी (सुधीन्द्र मेरे मामा जी के पौते हैं ) उनकी धरोहर की देख भाल कर रहे है ! सुधीन्द्र ने अपने बड़े बेटे जो इस समय गढ़वाल राईफल्स में सेवारत है की शादी कर ली है और मैं और ब्रिजेश इस शादी में सामिल हुए थे ! दादा लोगों ने
परेशानियां उठाई, मेहनत की और आज उनके नाती पोते उनकी मेहनत के फलों का स्वाद ले रहे हैं !
अब के मैं और मेरी पत्नी जून की १४ तारीख को ब्रिटिश इयर वेज से लन्दन होते हुए अमेरिका पहुंचे ! इन दिनों यहाँ का मौसम बड़ा ही सुहावन रहता है ! मई से सितम्बर तक वारीश भी होती है, हवाएं भी चलती हैं, कभी धूप कभी छाँव ! फिर सितम्बर सम्माप्त होने और अक्टूबर आते ही मौसम भी करवट बदलने लगता है ! राजेश के बहुत सारे ऐ ऐ टी के दोस्त यहाँ पर हैं, कुछ १०-१५ मील पर हैं कुछ ३०-४० मील के दायरे हैं और ये सभी लोग दो हफ्ते या महीने में एक बार जरूर मिल लेते हैं ! मकान सभी के अपने हैं जहाँ सारी सुविधाएं जैसे, पार्क, बच्चों के खेल, स्विमिंग पूल, टेनिस कोर्ट मौजूद हैं ! सर्दियों में स्वीमिंग पूल बंद हो जाते हैं लेकिन लोग अपने बच्चों को ३०-४० मील दूर स्वीमिंग कोचिंग के लिए ले जाते हैं ! यहाँ भी काम हफ्ते में पांच ही दिन चलता है और बाकी दो दिन बच्चों के मनोरंजन के लिए होते हैं ! इस तरह यहाँ की जिन्दगी चलती फिरती रहती है कभी आराम नहीं करती, यही इस कंट्री की विकास की कहानी है ! हर कोई आज के लिए जीता है और खुश रहता है ! कोई जमा नहीं चोरी नहीं, न काला धन ! अपना धन अपने देश में ! न काम चोरी न टैक्स चोरी ! जनता का पैसा जनता पर ही खर्च किया जाता है ! जो जिस विभाग का मंत्री उस विभाग की डिग्री है उस के पास ! चोरी हेरा फेरी यहाँ भी होती है पर ५% बाकी ९५% काम होता है ! यही कारण है की अमेरिका की खोज कोलंबस ने १४९२ ई० में की वह भी इंडिया समझ कर, उस समय यहाँ के लोग बिलकुल जंगली हालत में थे ! पैदावार के नाम केवल एक फसल मकई (भुट्टा) यहाँ पैदा होती थी ! हथियार के नाम इनके पास धनुष बाण, लोहे का गंडासा, छुरी, चाकू होते थे और इन्ही से ये लोग जंगली भैंसे, जंगली बकरे, खरगोस, हिरन का शिकार करते थे ! अलग अलग कबिले अलग अलग नामों से गाँव बसाकर रहते थे ! एक कबीला दूसरे कबीले के ऊपर अटैक करके मारकाट करके धन और जवान औरतों को लूट कर ले जाते थे ! कपड़ों के नाम से जंगली जानवरों की खाल बदन पर लपेटे रहते थे ! यहाँ के लेखक, उपन्यासकार, इतिहासकार इन जन जातियों को इन्डियन कहते हैं ! जब की भारत देश जब सिकंदर ने ३२५ ई० पू० पोरस पर अटैक किया था यहाँ के लोग कपडे पहिनते थे, अच्छे हथियार रखते थे और कही किस्म की खेती करते थे ! उस समय शिक्षा के लिहाज से भारत में दो विश्व विद्यालय थे, नालंदा और तक्षशिला जहां विश्व भर के विद्यार्थी विद्याध्यन के लिए आते थे ! हाँ जन जातियां ठीक अमेरिका में रहने वाले गाँवों में रहने वाली जन जातियों की तरह ही रहते थे ! १८१०-१५ तक अमेरिका के उत्तर-पश्चिम पर्वतीय इलाके बहुत पिछड़े थे और आज पूरा अमेरिका विश्व का नंबर वन स्थान पर है ! और हमारा भारत .....!
मेरे छोटे बेटे ब्रिजेश ने कोटद्वार में पाईन नीडल (चीड की पती वनाम पिरूल) से फायर ब्रिक्स बनाने की एक छोटी सी फैक्टरी लगा रखी है ! ये फायर ब्रिक्स कोयले की जगह ले रहा है ! ये पिरूल गर्मी शुरू होते ही गिरना शुरू हो जाता है और मई जून के महीनों में जंगलों में आग लगने का कारण बनता है ! हर साल इससे लगने वाली आग से जंगलात का करोड़ों की सम्पति जल कर राख होती है ! विश्व में जहां भी चीड के जंगल हैं वे सभी देश इसकी पत्तियों से परेशान हैं ! वातावरण में बढ़ते हुए प्रदूषण पर ये फायर ब्रिक्स अंकुश लगाने में सक्षम है ! प्रदूषण एक विश्व की समस्या है और जो भी संस्था, देश इस प्रदूषण पर कंट्रोल करने में सहयोग कर रहा है विश्व के बहुत से देश उस संस्थान और उस फैक्टरी में दिल चस्पी ले रहे है ! कोटद्वार में इसको देखने के लिए अभी तक स्वीटजर लैंड और जर्मनी के पत्रकार और टेलीविजन के लोग यहाँ आ चुके हैं ! इन्हीं दिनों ऐ ऐ एम अहमदाबाद ने नए नए उद्योग धंधों से जुड़े लोगों को इस इंस्टीच्यूट में बेसिक प्रशिक्षण देने के लिए निमंत्रित किया था ! सोलह हजार लोगों ने अप्लाई किया, जिसमें ६० लोग प्रशिक्षण के लिए चुने गए, जिसमें ब्रिजेश भी एक था ! इन ६० लोगों को ऐ ऐ एम अहमदाबाद ने १० अक्टूबर से २० अक्टूबर २०१० तक प्रशिक्षित किया ! २०अक्तूबर 2010 को भी कुछ लोग गढ़वाल भ्रमण को आए हैं और उनका पूरा भ्रमण का प्रोग्राम ब्रिजेश ने ही तैयार किया है जिसमें हमारी फैक्टरी भी सामिल है !

बुधवार, 13 अक्टूबर 2010

क्रिकेट / कामनवेल्थ 2010

आज इंडिया ने आस्ट्रलिया के खिलाफ दूसरा मैच भी ७ विकेट से जीत लिया है ! पोपोरे मैच में सचीन ही छाया रहा ! पहली पारी में २१४ रन (४९ वां टेस्ट शतक ) और दूसरी पारी में ५३ रन (नौट आउट ), मैंन आफ दी मैच एंड मैंन आफ दी सीरिज ) ! पहले टेस्ट में ९८ और ३८ ! इस तरह सचीन के छ डब्बल शतक, (एक डब्बल शतक वन डे में २०० रन) १४२४० रन (१७१ मैच) जहां शायद ही कोइ पहुँच पाए ! मुरली विजय ने सचीन का अच्छा साथ दिया, उसने दूसरे टेस्ट में गौतम गंभीर की जगह खेला और पहली पारी में १३९ रन और दूसरी पारी में ३७ रन बनाए (गौतम और द्राविड से से बेहतर) ! पुजारा जो लक्ष्मण (जिसने पहले टेस्ट में दूसरी पारी में ७७ रन (नावाद) बनाकर टेस्ट जिताया, ० उसके स्थान पर खेलने आया और पहली पारी में ४ और दूसरी पारी में ७२ रन बनाकर भारत को जीत दिलाने में अहम् भूमिका निभाई ! सहवाग ३०+७, द्राविड ०+२१(नावाद), धोनी ३० कोइ ख़ास नहीं कर पाए ! हरभजन और ओझा ने छ छ विकेट लिए, जहीर खान ने चार, श्रीसंत ने २ और रैना ने एक विकेट लिया ! रैना ने ३२ रन बनाए और रैना और धोनी को दूसरी पारी खेलने की जरूरत ही नहीं पडी ! भारत आज भी टेस्ट सीरीज के प्रथम पायदान पर टिका हुआ है ! राजपाल की अगुवाई में भारतीय हॉकी टीम भी निखारने लगी है, उसने पहले पाकिस्तान को ७ - ४ से हराकर सेमी फाईनल में जगह बनाई, फिर इंग्लैण्ड को ५ - ४ से हराकर फाइनल में जगह बनाई है कामन वेल्थ गेमों में ! १४/10/२०१० तकभारत ३८ गोल्ड, 27 सिल्वर 36 ब्रोंज मैडल लेकर 101 मैडल जीत चूका है ! इंग्लैण्ड ३७ गोल्ड के साथ 59 सिल्वर और 46 ब्रोंज के साथ 142 ले चुका है !
आस्ट्रेलिया 74 गोल्ड, 55 सिल्वर और 48 ब्रोंज के साथ 177 मैडल लेकर प्रथम स्थान पर डटा हुआ है !
कामनवेल्थ गेम सफता पूर्वक समाप्त हो गए हैं ! इसकी सफलता का श्रेय सेना को जाता है जहाँ केंद्र तथा दिल्ली की शीला दीक्षित की सरकार असफल रही वहीं केवल पांच दिन के अन्दर भारतीय सेना ने पूरी मेहनत और ईमानदारी से इस कार्य को संपन किया !

रविवार, 10 अक्टूबर 2010

मौसम बदल रहा है

यहाँ अमेरिका में मौसम भी आँख मिचौनी का खेल खेल रहा है ! पिछले २८ सितम्बर से आज १० अक्टूबर तक पूरे ११ दिन तक आसमान या तो घने काले बादलों से ढका रहा या फिर कभी जोर की कभी हल्की हल्की बुँदे बारीश की पड़ती रही ! कल शनिवार था और आज रविवार दोनों दिन सूरज अपनी पूरी चमक दमक के साथ अहसास कराता रहा की अभी घबराने की कोई बात नहीं है सर्दी चंद कदम दूर है ! पेड़ पौधे रंग बदलने लगे हैं, पहले सुनहरे लाल, फिर पीले, और फिर सुख कर पतझर ! कभी आसमान में बादल रहते हुए भी लगता है की सर्दी नाम की कोई चीज अभी कोसों दूर है और अगली दिन आसमान बिलकुल साफ़ लेकिन ठंडी हवाएं अंगुलियाँ टेढ़ी हो जाती हैं ! पर मौसम कितना भी खराब क्यों न हो, आसमान में जहाज उड़ेंगे ही, सडकों पर कार, ट्रक्स बसें चलेंगी ही, सिटी जाने के लिए लोगों को १०० मील कार से सर्विस करने जाना ही है ! इसके अलावा बहुत सारे पानी से समबन्ध रखने वाले गेम्स अब बंद हो चुके हैं ! और इन एजेंसियों की दुकान बंद होने से यहाँ काम करने वाले एक तरह से बेकार हो गए हैं ! समुद्र में कहीं कहीं जहां वर्फ जम जाती है वहां बोटिंग बंद हो गयी है ! फूल धीरे धीरे अपनी पंखुड़ियां एक एक करके हवा के झोंको में उड़ने के लिए छोड़ती जा रही हैं ! पेड़ भी भारी मन से अपने प्यारे पतों को जुदा करने लग गए हैं ! "पता टूटा डाल से पवन ले गयी उडाय, अब के बिछुड़े कब मिले दूर पड़े हैं जाय "! बच्चों के बहुत से खेल बंद हो गए हैं, लेकिन उनके मनोंरंजन के लिए अभी भी बहुत कुछ बाकी है ! स्विम्मिंग पूल जहां पानी का टेम्प्रेचर नहाने लायक रखा जाता है, बच्चों के लिए सर्दियों में भी खुला रहता है ! ऐडवेंचर लैंड जहाँ बच्चों के मनोरंजन की बहुत सारी सामग्री है बारह महीने खुली रहती हैं ! आज फिर आसमान बिलकुल साफ़ है और सूरज की ताप बहुत सुख दायक लग रही है ! अगले कुछ घंटों में क्या होगा कहा नहीं जाता !

कामनवेल्थ गेम 2010

आज १० अक्टूबर भारत में शाम हो चुकी है, मेडल लिस्ट आस्ट्रेलिया पहले स्थान पर है ६१ गोल्ड, ३६, सिल्वर और ३७ तांबा, भारत की उपलब्धी २९ गोल्ड, २२ सिल्वर और २२, ताम्बा, दूसरे स्थान पर है। इंग्लैण्ड बड़ी तेजी से नजदीक आ रहा है २६ गोल्ड, ४५ सिल्वर और ३० ताम्बा कुल भारत के ७३ के मुकाबले १०१ ! कनाडा भी रेस में सामिल है २२ गोल्ड, १२ सिल्वर और २५ ताम्बा लेकर ! आज खेल का सात दिन पूरे हो चुके हैं ! आज का मजेदार समाचार की भारत ने हॉकी में पाकिस्तान को ७-४ से रौंद कर सेमीफाईनल में जगह बना ली है ! सोमदेव वर्मन ने भारत को टेनिस में २९ वां गोल्ड मेडल दिलवाया !

बुधवार, 29 सितंबर 2010

आज की ताजी खबरें

कामनवेल्थ गेम्स
जी हाँ इस साल भारत कामन वेल्थ गेम्स दिल्ली में करवाने की जिम्मेदारी ले चुका है ! मंत्री, संतरी, नेता, नौकरशाह सभी भागते ही नजर आ रहे हैं ! शोर तो एक साल पहले से मचा था की इस वर्ष कामनवेल्थ गेम भारत में होंगे ! सरकार ने काफे बड़ी राशि इस गेम के लिए रिजर्व कर ली गयी थी, चेयर मैन बने सुरेश कलमाडी ! देख रेख की जिम्मेदारी थी दिल्ली के मुख्य मंत्री शीला दीक्षित की ! अगस्त तक पूरा पैसा जो गेम्स के लिए रिजर्व था पता ही नहीं चला कहाँ गया लेकिन काम ज़मीन पर कुछ भी नहीं हुआ ! नेताओं ने नौकरशाहों ने बड़े बड़े ठेके अपने नाते रिश्तेदारों को दे दिए ! प्रबंधकों की आँखे तब खुली जब जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम के पास बनने वाला पुल धरधराता हुआ नीचे आ गया ! उधर औडिटर जनरल ने गेम पर लगाए गए पूरी व्यवस्था पर ही सवालिया चिन्ह लगा दिया ! हर खरीदारी में करोंडो का हेर फेर औडिट में नजर आया ! जनता की खून पशीने की कमाई पर जिसका जहां दाव लगा वहीं डकार गए ! ऐडवरटाईजिंग कम्पनियाँ इन खेलों से किनारा करने लगे ! फिर दिल्ली सरकार की नींद खुली ! उन्होंने आनन् फानन में मार्केट में बिकनी वाली हर वास्तु पर तकस बढ़ा दिया गया, नतीजा महंगाई ! जब सिविल कामनवेल्थ गेम्स की तैयारी करने में बिलकुल असमर्थ हो गयी तो सेना की मदद
लेनी पडी ! गेम शुरू होने के एक हफ्ते पहले सेना को यह काम सौंपा गया और अब गेम तीन अक्टूबर को होने जा रहे हैं इसका पूरा श्रेय भारतीय स्थल सेना को जाता है ! भारत की इज्जत विश्व स्तर पर गिराने में सुरेश कलमाडी और उसकी फ़ोर्स ने कोई कमी नहीं छोडी थी लेकिन सेना ने ऐन वक्त पर पूरी जिम्मेवारी लेकर भारत की इज्जत बचा दी !
राम जन्म भूमि का विवाद
३० सितम्बर 2010 का दिन भारतीय इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा ! इस दिन इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने अयोध्या राम जन्म भूमि पर अपना फैसला सुना कर पिछले ६० सालों से चले आ रहे विवाद को समाप्त कर दिया ! रामजन्म भूमि पर १५२८ ई० में बाबर राम मंदिर को तोड़ कर बाबरी मसजिद बनवाई थी ! १९५० से यह केश कोर्ट में पेंडिंग पड़ा था ! कोर्ट के फैसले के मुताबिक़ विवाद वाली जगह मंदिर की है और राम जन्म भूमि न्यास को सौंप दी गयी है ! सीता की रसोई वाली जगह निर्मोही अखाड़ा को और तीसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया गया है ! कोर्ट के फैसले के बाद कोई अप्रिय घटना न हो इसके लिए प्रदेश और केंद्र सरकार ने सुरक्षा के पूरे प्रबंध कर रखे थे ! संतो ने अयोध्या राम जन्म भूमि को तीन भागों में बांटने के कोर्ट के फैसले के खिलाफ भारत बंद का ऐलान किया है ! शायद ही अमन पसंद लोगों को इस तरह के बंद करने और साम्प्रदायक झगणों को तूल देकर नयी समस्या खडी करने पर विष्वास होगा ! संतों का क्या है आश्रमों में हजारों लाखों इनके चेले और भक्त इन्हें चढ़ाव ही इतना चढ़ा देते हैं की इन्हें कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ती ! इन्हें कौन सा किसान सैनिक मजदूर की तरह काम करना है, कौन सा स्वामी रामदेव जी की तरह लाखों करोड़ों लोगों को योगा सिखा कर उन्हें निरोगी बनाना है, या दवाइयां बनाकर गरीब लोगों तक पहुंचाना है ! हाँ देश में संतों की एक बड़ी जमात है जो कहते कुछ हैं करते कुछ हैं ! बहुत से विश्व विख्यात संतों के तो करोड़ों का बिजनिस चलता है अपने नाम पर नहीं केवल ए से प्रोफिट की राशि के लिए जो हर हफ्ते/महीने पिछले दरवाजे से इनके आश्रम में पहुँच जाती है ! फिर भला संध्या, ध्यान, पूजा, भजन कीर्तन चाबीसों घंटे तो किए नहीं जा सकते, तो जो बाकी समय बीतता है दुनिया को दिखाने के लिए की हमारी भी एक जमात है, हमारी भी एक अलग पहिचान है, बन्ध करेंगे, रैली निकलेगी संतों की, सड़क पर जाम लग रहा है लगने दो, कोई बीमार समय पर हॉस्पिटल नहीं पहुँच पाने से दम तोड़ रहा है तोड़ने दो, इन संतों ने जो ठान ली है वह करना है ! अब अगर कोई भी संगठन इस कोर्ट के आदेश पर ऐतराज करता है जनता को उसका वहिष्कार कर देना चाहिए ! इससे अच्छा फैसला इस केश पे हो ही नहीं सकता था ! हर अमन पसंद देश के नागरिक को इस फैसले पर अपनी खुशी जाहिर करनी चाहिए !
इन्डियन आइल कोर्पोरेशन के चेयर मैन
पहली वार उत्तराखंड के श्री रणवीरसिंह बुटोला जी को इंडियन आइल कोर्पोरेशन का चेयर मैन बनाया गया है ! इंग्लिस न्यूज पेपर 'हिन्दू' तथा अन्य समाचार पत्रों के माध्यम से यह खबर बिजिनेस कालम के अंतर्गत ३० सितम्बर २०१० को छपी है ! श्री बुटोला जी का जन्म ०५ मई १९५४ को हुआ था ! एम बी ए करने के बाद उनहोंने फरवरी १९९१ ई0 ओ एन जी सी ज्वाइन किया डिपुटी जरनल मैनेजर की हसियत से ! १५/११/२००२ को उनकी योग्यता और आदर्श उनको ओ एन जी सी के डारेक्टर की पोस्ट तक पहुंचा गए ! १३/०५/२००४ ई० को उन्हें ओ एन जी सी का मैनेजिंग डारेक्टर बनाया गया ! ३० सितम्बर २०१० को उन्हें ६ प्रत्यासियों में से चुन कर ऐ ओ सी का चेयर मैन बनाया गया !
भारत पाकिस्तान मसला
भारत ने हमेशा से पाकिस्तान की तरफ दोस्ती का हाथ बढाया लेकिन उसने बदले में आतंकवादियों को ट्रेंड करके हमारे शहरों कस्बों में भेज कर मार काट की, साम्प्रदायक दंगे करवाए, काश्मीर घाटी में बार बार आतंकी हमला करवाए ! एक तरफ पाकिस्तान कहता फिरता है की हम भारत के साथ शांती वार्ता के लिए तैयार हैं और दूसरी तरफ पाकिस्तान में पल रहे आतंकियों को काबू नहीं कर पा रहा है ! वहां चाहे फ़ौजी तानाशाह शासक हो या कोई सिविलियन आतंकवाद पर काबू पाना इनके बस की बात नहीं है ! अमेरिका खूब जानता है लेकिन फिर भी पाकिस्तान को सैनिक साज सामान के साथ आर्थिक मदद भी देता जा रहा है ! बार बार सुरक्षा परिषद् तथा संयुक्त राष्ट्र संघ में काश्मीर के मसले को उठाकर पाकिस्तान समस्या को सुलझाने के वजाय उलझाता जा रहा है ! फिर पाकिस्तान के साथ शांती वार्ता कैसे शुरू हो, यह्सवाल १९४८ से लेकर आज तक ज्यों का त्यों बिना किसी उत्तर के लटका हुआ है ! आगे आगे देखो होता होता क्या ?

जादूगर चूहा

नदी के किनारे एक पेड़ से हट कर एक बिल बनाकर एक चूहा रहता था ! वह सुबह ही अपनी पेट पूजाके लिए अपने बिल से निकल पड़ता था, चील, कौवे, बिल्ली, कुते, सांप और अन्य दुश्मनों से बचता बचाता जो कुछ भी भी मिल जाता खाता और वापिस अपने बिल में लौट आता ! कभी कभी तो खाली पेट ही लौट आता फिर भी भगवान् को मनाना "हे ईश्वर खाली पेट ही सही, सही सलामत तो लौट आया" ! गुजर रही थी और वह अपने में खुश था ! लेकिन उसकी खुशी ज्यादा दिन तक नहीं रही ! एक दिन सुबह सुबह वह अपने बिल से निकल रहा था की क्या देखता की पेड़ की जड़ में जो बिल है उसमें एक काला सांप घुस रहा है ! अब रात दिन वह सांप के भय से ग्रस्त रहने लगा !
और एक दिन वह सुबह सुबह अपने बिल से जल्दी ही निकल गया ! चलते चलते दुश्मनों से अपने को बचाते हुए वह नदी के किनारे किनारे वहां पहुँच गया जहां बालू ही बालू था ! वह कुछ देर उस बालू में उछलता कूदता रहा और मस्त हो कर अपने आज का भरपूर आनंद लेता रहा, यह सोच कर की पता नहीं अगले पल उसके साथ क्या होने वाला है ! फिर अचानक एक अचम्भा हो गया ! उसे उस बालू में एक चमकता हुआ गोल मोल छोटा सा लाल पत्थर नजर आ गया ! उसने उस पत्थर को अपने मुंह में दबाया और बड़ी मस्ती से खरामें खरामें अपने बिल की तरफ जाने लगा ! अब उसे किसी से भी कोई डर नहीं लग रहा था ! शरीर के अंदर एक विशेष प्रकार का आनंद उसे महसूस हो रहा था ! जैसे ही वह अपने बिल के पास पहुंचा उसे वही काला सांप नजर आया जैसे वह उस चूहे का ही इंतज़ार कर रहा हो ! आज वह चूहा उसे देख कर न डरा न उसे कोई घबराहट ही हुई ! अचानक उसके दिमाग ने सोचा, काश यह सांप गिलहरी बन जाता और सच मुच में वह सांप देखते ही देखते गिलहरी बन गया और भागता हुआ पेड़ पर चढ़ गया ! यह तो अचम्भा हो गया ! कमाल हो गया ! अभी तक वह जादुई लाल पत्थर उसके मुंह में ही था ! वह अब इतमिनान से अपने बिल में चला गया ! आज उसने पूरे दिन कुछ भी नहीं खाया था और इस चमकीले पत्थर के मिलने की खुशी में उसे लगा भी नहीं की वह भूखा है ! जब उसने पत्थर मुंह से नीचे रख दिया तो उसे भूख का आभास होने लगा ! उसने अपना दाहिना पंजा उस चमकीले पत्थर पर रखते हुए मन में सोचा 'काश' यहाँ पर मेरे लिए अन्दर सारा भोजन आ जाय, और वहां भोजन से उसका बिल भर गया ! अब उसने मन में सोचा की मेरा यह बिल एक सुन्दर घर जैसा बन जाय ! और देखते ही देखते बिल के अन्दर ही अन्दर चूहे का एक ख़ूबसूरत सा घर तैयार हो गया ! एक कमरा उसके सोने का, एक कमरा खाने का सामान रखने का, बाथ रोम और एक स्पेशल रोम जादुई चमकदार पत्थर के लिए ! दरवाजा काफी मजबूत था, जब चूहा चाहेगा तभी खुलेगा नहीं तो बंद ही रहेगा ! अब चूहे की जिन्दगी अन्य चूहों से बिलकुल भिन्न हो गयी थी ! अभी वह कुंवारा था ! अब एक सुन्दर सी चुहिया की तलाश में था ताकि शादी करके घर बसाए लेकिन जैसी दुलहन उसे चाहिए थी उसे मिली नहीं और उसने शादी का इरादा ही छोड़ दिया ! एक दिन उसके दिमाग में आया की 'आज कुछ और चमत्कार करके देखा जाय ' ! वह उस जादुई पत्थर को मुंह में दबाकर अपने दरवाजे पर बैठ गया ! सामने एक लोमड़ी आ रही थी ! चूहे को सामने देख कर उसके मुंह में पानी भर आया, वह धीरे धीरे उसको खाने की गरज से उसके नजदीक आने लगी, जब वह बहुत करीब आ गया तो चूहे ने दिमाग में सोचा, 'काश यह लोमड़ी एक छोटा मृग बन जाय और वह लोमड़ी सच मुच में एक छोटा मृग बन गया ! उसी समय उधर से एक भेड़िया आया और उस लोमड़ी बने मृग को मार कर खा गया ! अगले दिन वही भेड़िया उसके बिल के आगे से गुजर रहा था, उसकी भी नजर चूहे पर पड़ गयी, वह भी चूहे को मारने की नियत से जादूगर चूहे के नजदीक तक आ गया, फिर चूहे ने सोचा की 'काश यह भेड़िया खरगोश बन जाय और वह भेड़िया खरगोश बन गया, उसे उड़ते हुए एक चील पकड़ कर आसमान में ले जाकर खा गयी ! वैसे वह केवल हिंसक पशुवों को ही साकाहारी पशु में बदली करता था, लेकिन सारे जंगल में यह खबर आग तरह फ़ैल गयी की एक चूहा जादूगर बन गया है और वह जिसको भी चाहता है बदली कर देता है, सांप को गिलहरी, लोमड़ी को मृग, लक्कड़ बग्घे को नील गाय ! उसने तो एक मगर मच्छ को भी बदली करके मछली बना दिया है, एक जंगली कुते को जंगली बकरा बना दिया, आदि आदि ! चूहा अब घमंडी हो चला था, किसी को कुछ नहीं समझता था, जंगल के सारे छोटे बड़े जानवरों ने उसके घर के आगे से आना ही छोड़ दिया था ! यह खबर उड़ते उड़ते जंगल के राजा शेर के कानों में भी पड़ गयी ! शेर ने महसूस किया की सारे जंगल में एक अदना सा चूहे की ही बात हो रही है शेर की तो कोई बात ही नहीं करता ! चलो एक बार चल कर देखते हैं उस जादूगर चूहे के चमत्कार को ! मंत्री मंडल के कुछ सदस्यों ने शेर को चेताया भी की ये जादूगर चूहा छोटा मोटा जादूगर नहीं है बड़ा पहुंचा हुआ जादूगर है, इसे जितनी दूरी बना कर रखा जाय वही ठीक रहेगा, कहीं इसने अपना जादू हम पर आजमा दिया और हमें ही कुछ बना दिया फिर क्या होगा ! लेकिन शेर बहादुर और दिलेर था जादूगर की भभकियों से डरने वाला नहीं था ! वह अपने मंत्रियों के साथ चूहे के दरवाजे पर आ गया ! शेर को देखते ही चूहे की सांश रुक गयी, उसके दिमाग ने सोचना छोड़ दिया, उसे पता भी नहीं चला की घबराहट में उसके मुंह से कब वह चमत्कारी पत्थर निकल कर अचानक कहीं गायब हो गया ! वह बेहोश होगया, जब उसे होश आया, अपने को एक निर्बल असहाय चूहे के रूप में पाया, अब वह जान बचाने के लिए भागा भी लेकिन तब तक देर हो चुकी थी, एक बिल्ली जो काफी दिनों से उसकी तलाश में थी, ने उसे पकड़ कर उदर ग्रस्त कर दिया था ! फिर एक नयी खबर आग की तरह जंगल में फैल गयी की जादूगर चूहा परलोक सिधार गया है !

मंगलवार, 28 सितंबर 2010

रामायण के रहस्य (सातवाँ भाग)

भगवान राम अपने निजी कक्ष में बैठे हुए हैं, सोचते हैं धरती पर आने का काम पूरा हो गया है ! रघु कुल परिवार में पैदा हुआ ! "रघुकुल रीति सदा चली आई, प्राण जांए पर बचन न जाईं " ! पिता जी ने माता केकई को कभी असुरों के साथ संग्राम करते उनके द्वारा, पिता जी की जान बचाने लिए, किये गए चमत्कारिक उपाय और सच्ची क्षत्राणी के जौहर से खुश होकर दो वरदान दिए थे ! माता केकई ने जब महाराजा दशरथ के रथ की धुरी की कील निकल गयी थी और रथ कभी भी उलट सकता था और महाराजा की मृत्यु भी हो सकती थी, अपनी उंगली उस धुरी के अन्दर डाल दी और तक तक उंगली उस धुरी पर रखी जब तक सारे असुरों को महाराजा दशरथ ने यमपुरी नहीं पहुँच दिया ! यदपि रानी केकई की उंगली काफी जख्मी हो गयी थी लेकिन महाराजा दशरथ की जान ही नहीं बची थी बल्की असुरों पर विजय भी मिली थी ! इसी लिए वो दो वरदान रानी केकई को मिले थे ! भगवान राम को राज तिलक करने का दिन आया, लेकिन ऐन मौके पर रानी केकई ने महाराजा दशरथ से अपने दो वरदान पूरे करने को कहा, एक से राम को १४ साल का वनवास और दूसरे से भरत को राजसिंघासन ! अब राजा अपने वचनों से हट भी नहीं सकते थे और राम से दूर भी नहीं रह सकते थे ! राजा दशरथ को याद आई अपनी अंधी बहिन और अंधा बहनोई ! राजा दशरथ की एक ही बहिन थी और वह भी अंधी ! आखिर एक अंधे से ही उसकी शादी करके उन्हें सदा के लिए विदा कर दिया गया था ! न वे ही आए और न राजा दशरथ ही ने उन्हें कभी याद किया ! और एक दिन जब राजा दशरथ जंगल में आखेट खेलने गए हुए थे, उन्हें एक चश्मे से कुछ ऐसी आवाजें आ रही थी जैसे कोई हिरन पानी पी रहा हो ! वे शब्द भेदी वाण चलाने में माहीर थे ! उन्होंने चश्मे की तरफ गद गद शब्द पर वाण चला दिया ! वाण चश्मे पर पानी भरते हुए शरवन कुमार के जा लगा ! राजा दशरथ जैसे ही चश्मे पर पहुंचे और जा कर क्या देखते हैं कि उनके वाण से एक निर्दोष बालक की ह्त्या हो गयी है ! बालक शरवन कुमार अपने बूढ़े, अंधे माँ बाप को तीर्थ स्थानों की यात्रा करवाने के लिए ले जा रहा था ! यहाँ चश्मे के पास आकर माँ ने कहा, "बेटा शरवन बड़े जोर की प्यास लगी है, सामने चश्मे से पानी भर कर ले आ " ! वह अपने प्यासे माँ बाप को पानी पिलाने के लिए चश्मे पर पानी भर रहा था ! मरते हुए बालक ने रजा दशरथ से कहा "महाराज यह पानी मेरे प्यासे माँ बाप को पिला देना और मेरी मृत्यु के बारे में उन्हें कुछ न बताना ", यह कहते हुए वह भगवान को प्यारा हो गया ! उधर राजा दशरथ शोकग्रस्त डरते डरते पानी लेकर उनके पास पहुंचा और पानी का वर्तन बिना कुछ कहे शरवन की माँ को पकडवा दिया, लेकिन वे तो गंध से ही पहिचान गए थे कि यह शरवन न होकर कोई और ही है ! माँ ने कहा, "बेटा शरवन तो कहता क्यों नहीं है?" लेकिन राजा दशरथ चुप ही रहे, कुछ नहीं बोले, गला रुंध गया था, आँखों में आंसू बहने लगे थे ! बड़ी मुश्किल से बोल पाए पहले पानी पीकर प्यास बुझा लो ! इतना सुनते शरवन के पिता बोले, "बता तू कौन है? हमारा शरवन कहाँ है ? कहीं तूने उसे मार तो नहीं दिया !" ? आखिर राजा दशरथ ने अपना अफाराध स्वीकार कर लिया और दोनों को अपने साथ अयोध्या चलने को कहा ! सुनते ही दोनों शरवन के माँ पिता जी शोक में शरवन शरवन करते हुए स्वर्ग सिधार गए ! लेकिन जाने से पहले राजा दशरथ को श्राप दे गए थे "कि जैसे पुत्र बियोग में हम छट फटाते हुए मृत्यु की गोद में जा रहे हैं वैसे ही तुम भी पुत्रों के वियोग में तड़प तड़प कर मरोगे " ! भगवान फिर अपने वर्तमान में आ गए ! आज उन्होंने यमराज को विशेष वार्ता के लिए बुलाया था ! उन्होंने लक्ष्मण को आदेश दिया कि जब वे यमराज के साथ मंत्रणा कर रहे हों तो किसी को भी अन्दर मत आने देना ! यमराज आए और भगवान राम के साथ गुप्त मंत्रणा करने लग गए ! इसी समय उस समय के सबसे क्रोधी ऋषि दुर्वाशा वहां गेट पर आए और लक्ष्मण से द्वार खोलने को कहने लगे ! लक्ष्मण जी ने बड़ी शालीनता से भगवान राम के आदेश को ऋषि को सुना दिया ! दुर्वाषा और भी क्रिधित होकर कहने लगे "या तो जल्दी द्वार खोल दो नहीं तो मैं तुम्हे ही अपने क्रोध की अग्नि में भाष कर दूंगा ! " लक्ष्मण जी ने द्वार खोल दिए ! दुर्वाषा ऋषि क्रोध में लाल पीला होकर वहां पहुँच गया जयां राम यमराज के साथ गुप्त मंत्रणा कर रहे थे ! राम जल्दी से बाहर आए यह देखने के लिए कि लक्ष्मण ने दुर्वाषा को अन्दर कैसे आने दिया ! क्या देखते हैं लक्ष्मण कुछ ही दूरी पर अटूट समाधी लगा चुके थे, राज्याज्ञा का उलंघन करने पर उन्होंने स्वयं ही दंड स्वरूप इस शरीर का ही त्याग कर दिया ! भगवान राम भी दुखी हो कर शरयु के किनार किनारे वट वृक्ष की छाया में नदी के जल में उतरे और वहीं जल समाधी ले ली ! यह स्थान गुप्तार घाट के नाम से जाना जाता है ! यहीं पर एक छोटा सा मंदिर है जहाँ भगवान राम की चरण पादुका सुरक्षित रखी हुई हैं ! इस घाट पर बड़ी संख्या में लोग स्नान करके तीर्थ जल स्नान का लाभ उठाते हैं ! ये थी श्री रामचंद्र भगवान की कथा ! जय श्री राम !!

सोमवार, 27 सितंबर 2010

रामायण के रहस्य (छटा भाग )

अयोध्या में रामराज्य की चर्चा चारों और फ़ैल गयी है ! बड़े बड़े विद्वान, ऋषि मुनि, साधू सन्यासी बड़ी संख्या में अयोध्या में जुड़ने लगे ! भगवान् राम ने सारे राज्य में अपने ख़ास दूत फैला रखे थे ताकी वे जनता की सुख दुःख की खबर सीधे भगवान् को देते रहें ! सब कुछ ठीक चल रहा था, प्रजा खुश थी, चारों और अमन चैन था, सब ओर शांती ! प्रशासन चुस्त दुरुस्त था ! कोई गरीब नहीं था, कोई चोर डकैत नहीं था ! लेकिन ईश्वर की माया ही अजीब है ! एक दिन भगवान राम का एक दूत उनके पास आया और कहने लगा, प्रभु प्रजा सुखी है, चारों ओर शांती का साम्राज्य है, लेकिन एक राज घराने का धोबी अपनी पत्नी से झगड़ा कर रहा था और कह रहा था, मैं श्री राम जैसा नहीं हूँ की पति एक साल तक रावण की कैद में रही और फिर पत्नी रूप में स्वीकार कर ली ! भगवान् सोचने लगे, मैंने सीता की अग्नि परीक्षा तो लंका में बानर और रिक्ष सेना के सामने किया था, अयोध्या वासियों को कैसे यकीन दिलाऊं की सीता आज भी उतनी ही पवित्र है जितनी पहले थी ! वे मर्यादा पुरुषोतम श्री राम थे ! मर्यादा का पालन करना था ! उन्होंने लक्ष्मण को बुलाया और उन्हें आदेश दिया कि सीता जी को घूमाने के बहाने जंगल में ले जाओ और उन्हें जंगल में छोड़ कर वापिस लौट आओ ! यह आदेश सुनकर लक्ष्मण जी की हालत कितनी दयनीय हो गयी होगी, वे अन्दर के आंसुओं से कितना रोये होंगे ! वे १४ साल तक भगवान राम और माता जानकी के साथ बन में रहे और इन १४ सालों में एक दिन भी सोये नहीं, केवल राम सीता जी की सुरक्षा के लिए और आज एक राजा की आज्ञा से निरपराध माता सीता को जंगल में अकेला छोड़ कर आने का आदेश हुआ है ! उनको याद आत़ा है कि जब मेघनाथ मारा जाता है और उसकी पत्नी अपने पति का पार्थिव शरीर लेने भगवान राम के पास आती है तो राम, लक्ष्मण से कहते हैं, "लक्ष्मण याद करो सुलोचना तुम्हारी पुत्री है !" सुलोचना शेषनाग की कन्या है और लक्ष्मण जी शेषनाग के ही अवतार हैं ! उसी पुत्री के सुहाग को उजाड़ दिया, क्यों, केवल सीता माता को रावण की कैद से छुड़ाने के लिए !
जी को कड़ा करना पड़ा, राज्याज्ञा का पालन करना पड़ा ! लक्ष्मण माता सीता को वन देवी के सुपुर्द करके वापिस अयोध्या लौट आए ! वहां जंगल में सीता जी को महर्षि बाल्मिकी जी के दर्शन हुए वे उन्हें अपने आश्रम में ले गए ! वहीं लब-कुश दो भाइयों का जन्म हुआ ! भगवान् राम ने अश्वमेध यज्ञ किया और अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को इन दोनों भाइयों ने अपने आश्रम के पास ही बाँध दिया ! अश्व को छुड़ाने आए लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न तथा हनुमान जी भी घायल हो गए ! तब स्वयं भगवान राम वहां आते हैं उन वीर बालकों को देखने के लिए ! इसी बीच सीता जी को खबर हो गयी कि 'लब-कुश ने भगवान राम के अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को बाँध रखा है, पूरी सेना उन दो बालकों से घायल हो चुकी है, अब स्वयं भगवान राम उन बालकों से युद्ध करने आए हैं' ! सीता जी वहां पर आती हैं, भगवान राम के दर्शन करने के बाद दोनों बेटों को (लब-कुश) राम को सौंप देती हैं और स्वयं धरती माँ की गोद में समा जाती हैं ! बच्चो के पास जब माँ थी तो पिता जी नहीं थे, पिता जी मिले तो माँ सदा के लिए छोड़ कर चली गयी ! जग जननी सीता माँ, मर्यादा पुरुषोतम श्री राम की धर्म पत्नी, 'कौन सा सुख भोगा उन्होंने इस धरती पर आकर !
( अगले भाग में जारी )

रविवार, 26 सितंबर 2010

अमेरिकन वनाम भारती

एक अमेरिकेन ने अपने इकलौते बेटे को इन्जिनीरिंग में पी एच डी करवा दी और उससे बोला, "my dear son, I have done my duty and now you are free to start your new life. Herein after neither I have to give you any type of help nor I will ask for it." His son requested for some financial help, which his father refused to oblige. अब आप जरा गौर फरमाएं अपने भारतीय डैडी और उनके तीन संतानों में से सबसे बड़े बेटे के बीच की वार्ता जिसको उन्होंने पढ़ाया लिखाया, और काबिल बनाया ताकि वह आने वाले समय में एक अच्छी सर्विस करके अपना शौक तो पूरा करे ही साथ ही परिवार की जिम्मेदारी भी संभाले ! अपनी पढाई पूरी करने के बाद एक दिन वह अपने पिता जी से बोलता है, "डैड मैं नौकरी नहीं करना चाहता हूँ बल्कि अपना ही कोई व्यवसाय खोलना चाहता हूँ ! इसके लिए मुझे पैसे चाहिए ! " बाप ने कहा, "बेटे मैंने अपनी बड़ी रकम तो तेरी पढाई पर लगा दी है, बैक से लोन लिया था वह भी अभी चुकता नहीं हो पाया है ! अभी तेरे दो भाई और हैं जो अभी पढ़ रहे हैं और मुझे उनकी पढाई के लिए अब तेरी मदद की जरूरत है, मेरी मान अभी नौकरी करले, जब पैसे हो जाएंगे तो तुम फिर अपना कोई भी धंधा जो अच्छा लगे शुरू कर देना "! लड़का गुस्से में बोला, लगता है बूढा सठिया गया है, जब आप में तीन बच्चों का बोझ उठाने की सामर्थ नहीं थी तो फिर पैदा क्यों किए ! मुझे पैसे चाहिए १० दिन के अन्दर चाहे बैंक से कर्ज लो, इस मकान को बेचो, कुछ भी करो मुझे पैसो दो "! बेचारा भारती मूल का आदमी, पच्चपन साल का आज भी कठीन मेहनत कर रहा है, ओवर टाईम भी काम करता है, शरीर काफी जर्जर हो गया है और लगता है की ७० पार कर गया है ! अब वह अपने देश भारत को वापिस जाना चाहता है लेकिन वहां की प्रोपर्टी भी रिश्तेदारों ने हड़प ली है ! पैसे इतना हो नहीं पा रहा है की लड़का अपना बिजिनिस शुरू कर सके और लड़का है की कोई अन्य काम करने को तैयार ही नहीं है ! अब बाप क्या करे, रोज हारे थके घर आत़ा है और बेटे के जहरीले वाणों से घायल होता रहता है !

शनिवार, 25 सितंबर 2010

रामायण के रहस्य (पांचवां भाग )

युद्ध भूमि में रावण के दशों शिर और बीसों भुजाएं कट कट कर धरती पर गिर गए ! फिर पापों से भरा शरीर भी आखिर पृश्वी पर आ गिरा ! कितनी भयानक घोर गर्जना हुई होगी, पूरी लंका तो हिल ही गयी होगी ! लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ ! तीनों लोको के नाथ भगवान् राम वहां लंका में खड़े थे, और उनकी पूरी बानर और रिक्ष सेना थी, फिर एक मात्र रावण के भारी भरकम शरीर के गिरने से धरती कैसे हिला सकती थी ! रावण के साथ ही रावण के ज़िंदा ही स्वर्ग जाने स्वप्न भी बिखर गए ! उसके स्वर्ग जाने के लिए ९९ सीढियां भी उसके गिरने के साथ ही गिर गयी ! सारे गृह सारे देवता जो उसकी कैद में थे मुक्त हो गए ! शनिश्चर जैसे ग्रहों को हनुमान जी ने पहले ही छुडा लिया था ! कहते हैं जब हनुमान जी ने लंका में आग लगाई थी, और वे एक सिरे से दूसरे सिरे तक जा रहे थे, तो उनकी नजर शनी देव पर पड़ गयी ! वे एक कोठरी में बंधे पड़े थे ! हनुमान जी ने उन्हें बंधन मुक्त किया ! मुक्त होने पर उन्होंने हनुमान जी के बल बुद्धी की भी परिक्षा ली और जब उन्हें यकीन हो गया कि वव सचमुच में भगवान रामचंद्र जी के दूत हनुमान जी हैं तो उन्होंने हनुमान जी से कहा कि "इस पृश्वी पर जो भी आपका भक्त होगा उसे मैं अपनी कुदृष्टि से दूर ही रखूंगा, उसे कभी कोइ कष्ट नहीं दूंगा " ! इस तरह शनिवार को भी मदिरों में हनुमान चालीसा का पाठ होता है तथा आरती गाई जाती है ! लंका का राज विभीषण को देकर भगवान् रामचंद्र जी, लक्ष्मण, सीता जी, सुग्रीब, अंगद, जामवंत और हनुमान जी को साथ लेकर पुष्प विमान से अयोश्या के लिए चल पड़े ! जिस शिला खंड को हनुमान जी संजीवनी वती के साथ हिमालय से उठाकर लाए थे उसे भगवान राम ने वृन्दावन में उतार दिया था और उसी पर्वत को द्वापर में कृष्ण भगवान ने अपनी उंगली पर उठाकर सारे गोकुल निवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाया था ! वही पर्वत गोवर्धन पर्वत के नाम से जाना जाता है ! अयोध्या आकर भगवान राम का राज्याभिषेक किया गया ! उस दिन पूरी अयोध्या को दीपों की माला से सजाया गया था ! प्रजा सुखी हो गयी ! चारों ओर अमन चैन सुख शांती का माहोल था ! कोई गरीब, दुखी, रोगी, भूखा भिखारी नहीं था ! भगवान ने जनता की फ़रियाद सुनने के लिए अपने महल के बाहर न्याय घंटी लगा रखी थी, न्याय पाने के लिए कोई भी आकर इस को बजा देता था और उसकी फ़रियाद सूनी जाती थी ! सुनते हैं एक बार एक कुते ने यह घंटी बजा दी ! ये वो ज़माना था जब कि जानवर भी इंसान की भाषा बोलते थे ! भगवान ने उससे पूछा कि उसे क्या दुःख है तो उसने आगे के दोनों पावों को उठाकर पंजे मिला कर नमस्कार मुद्रा बनाकर कहा, "भगवन आज मैं सुबह सुबह रास्ते के किनारे लेता था कि एक ब्राह्मण ने आकर मुझे लाठी मार दी " ! भगवान राम ने उसी समय ब्राह्मण को बुलवाया और उसे कुते को मारने का कारण पूछा ! ब्राह्मण ने कहा "हे राम मै सुबह सुबह सरयू नदी से नहा कर आ रहा था ! अँधेरे में मुझे नजर नहीं आया और मेरा पाँव इस से टकरा गया, इस तरह मैं अशुद्ध हो गया और मुझे फिर शुद्ध होने के लिए सरयू नदी में नहाने के लिए जाना पड़ा ! इस लिए मैंने इसे डंडा मारा "! भगवान ने कहा, "ब्राह्मण देवता कसूर तो आपने किया है एक निरपराध को आपने डंडा मारा है, आपको सजा तो मिलेगी" ! बीच में कुता बोला भगवन गुस्ताखी माफ़ हो, ब्राह्मण देवता को क्या सजा मिलनी चाहिए, क्या मैं कह दूं ? भगवान ने कहा, "कहो "! कुते ने कहा , "प्रभु इन्हे आप अपने मंदिर के पुजारी बना दें "! और भगवान राम ने उस ब्राह्मण को अपनेकुल मंदिर का पुजारी नियुक्त कर दिया ! कुते के रिश्तेदार इकट्ठे हो कर उसका मजाक उड़ाने लगे, "अबे ये कोई सजा नहीं दी गयी बल्की ब्राह्मण को तुम्हे डंडा मारने का इनाम दिया गया है "! कुते ने कहा "नहीं बन्दों यह बात नहीं है, आसल में बात यह है कि पिछले जमाने में मैं भी मंदिर का पुजारी था और स्वयं देख लो अब क्या हूँ "! सारे कुते प्रशन्न होकर नाचने लगे !