बुधवार, 21 सितंबर 2011
नारद जी धरती पर आये - सातवीं किस्त
रविवार, 7 अगस्त 2011
नारद जी धरती पर आए छट्टी किस्त
मंगलवार, 5 जुलाई 2011
नारद जी धरती पर आये - पांचवी किस्त
यहाँ भी गंगा के इस बदले हुए रूप को देखकर नारद जी को कुछ बेचैनी जरूर हुई पर हरी इच्छा कहते हुए वे आगे श्रीनगर पहुंचे ! अलकनंदा के किनारे बसा श्रीनगर कभी गढ़वाल के राजाओं की राजधानी हुआ करती थी ! वैसे अलकनंदा की बाढ़ ने इस रमणीक पुरानों में वर्णित श्रीनगर को कही बार उजाड़ा और मनुष्यों ने भी कुदरत से बार बार लोहा लेकर इसके अस्तित्व को मिटने नहीं दिया ! १८०३-०४ ई० में गोरखों ने अटैक करके लूट पाट मचा कर इसको फिर उजाड़ दिया था ! लेकिन अलकनंदा अठखेलियाँ करती हुयी, पर्वत श्रृंखलाएं , पेड़ पौधों की विभिन्न किस्मे, रंग विरंगे फूलों की चारों ओर बिखरी खुशबू, हरे भरे सीढीनुमा खेतों ने इस पहाडी पर्वत को कुदरत द्वारा दी गयी सौगात से आज भी सजा धजा कर खूबसूरती का ताज पहिना रखा है! नारद जी कुछ देर के लिए अलकनंदा तट पर भगवान की स्तुति में खो से गए थे ! आज यहाँ पर गढ़वाल यूनिवर्सिटी है, स्कूल हैं कॉलेज हैं, खेल के मैदान डाक खाना तार घर हैं ! यहाँ से चलकर नारद जी रुद्रप्रयाग आए, अभी तक वे अदृश्य होकर अपना सफ़र कर रहे थे, लोगों की बातें सुन रहे थे कुदरत की लीला के साथ मनुष्य निर्मित नदियों के पुल, नदियों पर बंधे बाँध, सड़कें, नदी के कुदरती बहाव को रोक कर पहाड़ों के अन्दर सुरंग बनाकर नदी के रुख को बदलने का भागीरथ प्रयत्न ! कही स्थानों पर चट्टानों के खिसकने से गाँवों की तवाही भी नारद जी की नज़रों से नहीं बच पायी ! रुद्रप्रयाग संगम मंदाकिनी और अलकनंदा का ! एक नदी मंदाकिनी केदारनाथ के शिव जी के चरणों को धोती हुई, और उधर अलकनंदा श्री बद्रीनाथ के चरण स्पर्श करती हुई पहाड़ों की चट्टानों से गरजना करती हुई, इस पवित्र स्थान पर आकर मिलती है ! समुद्र तल से २००० फीट की ऊंचाई पर बसा यह कस्बा आधुनिक साज सज्जा से युक्त धर्मशालाए और आरामदायक होटलों के कारण प्रयाटकों का आकर्षक केंद्र बिंदु है ! यहाँ से एक सड़क केदारनाथ के लिए और दूसरी बद्रीनाथ के लिए चली जाती है ! यहाँ से पंडों का राज शुरू हो जाता है, सारे धर्मशालाएं, होटल्स, लाज, आलीशान कोठियां इन पंडों की ही निजी सम्पति है ! इलाके के सबसे रईसों में है इन पंडों की गिनती ! नारद जी रूद्र पयाग से तिल वाडा अगस्त मुनि पहुंचे ! गुप्तकाशी में शिव भगवान के दर्शन किए ! किवदंती के मुताबिक़ पांडवों से रोष्ट होकर शिव जी इसी स्थान पर गुप्त हुए थे इसीलिये इसका नाम गुप्त काशी पड़ा ! फिर नारायण कोटि होते हुए, फाटा, सोनप्रयाग और पहुंचे गौरी कुंड ! गौरी कुंड मंदाकिनी नदी के तट पर बसा हुआ कस्बा है जो गर्मियों में गुलजार रहता है और सर्दियों में बर्फ से ढक जाता है, नवम्बर से अप्रेल तक मानव रहित सफ़ेद चद्दर के आवरण में लिपटा चुप चाप सूरज की तेज किरणों का इंतज़ार करता रहता है ! नारद जी ने गौरी कुंड के तप्त जल में स्नान किया, एक रात यहाँ एक लाज में विश्राम किया ! गौरी की पूजा अर्चना की प्रशाद लिया ! वहां बहुत बड़ी संख्या में लोग केदार-बद्री दर्शनों की लालसा लिए दूर दराज के इलाकों से आये थे ! इनमें अमीर भी थे जो फाटा से हेलीकाफ्टर से सीधे केदारनाथ जा रहे थे और हेलीकाफ्टर से ही वापिस फाटा आरहे थे ! कुछ मध्यवर्ग के लोग थे तो कुछ गरीब थे ! कुछ अपाहिज भी थे फिर भी दर्शन करने आये थे ! कुछ लम्बी बीमारी से ग्रस्त रोगी भी थे जिन्हें धर्माचारियों ने, ज्योतिषियों ने इस किस्म की बीमारी का इलाज केवल केदारनाथ-बद्रीनाथ यात्रा बतलाया था, वे अपने बेटे बहु या रिश्ते दारों के साथ आये थे ! कुछ लोग खच्चरों में जा रहे थे तो कुछ पैदल १४ मील की कठीन चढ़ाई चढ़ कर केदारधाम पहुँच रहे थे कुछ दर्हन करके वापिस आरहे थे ! नारद जी भी इन पैदल यात्रियों के दल में सामिल होकर जय केदार जय बद्रीनाथ कहते हुए चढ़ाई चढ़ रहे थे और इस विभिन्न श्रेणी के लोगों के बीच सफ़र का आनंद ले रहे थे ! यहाँ कोइ किसी की जातित धर्म नहीं पूछ रहा था, न किसी की अफसर साही, नौकरशाही, नेता मंत्री या घसियारा, मोची, धोबी का ही कोइ भेद कर रहा था, एक स्वर और एक आवाज गूंज रहा था जैकारा का ! विभिन्नताओं में एकता का जीता जागता प्रमाण ! आखीर नारद जी इस दल बलके साथ केदारनाथ पहुँच गए ! वहां आगे मिले उतने ही पण्डे जितने दर्नार्थी थे, वे दर्शन करने आए लोगों से उनके जिला, प्रदेश और निवास स्थान, पूछ कर अपने जजमानों को अपने साथ अपनी धर्म शालाओं, होटलों में ले जा रहे थे ! नारद जी भी एक सज्जा सजाया होटल में एक रईस के साथ ही चले गए ! क्रमशः
सोमवार, 4 जुलाई 2011
नारद जी धरती पर आए - चौथी किस्त
रविवार, 3 जुलाई 2011
नारद जी धरती पर आए - तीसरा भाग
नारद जी फिर धरती पर आये द्वितीय भाग
लेकर कुदरत को ही बदल देते हैं ! देवता तो अजर अमर होने के बाद भी जो सम्पति उन्हें विरासत में मिली है उसी को भी संभाल कर नहीं रख पा रहे हैं और जो भोग विलास की वस्तुवें स्वर्ग लोक निर्माण के समय देवताओं को दी गयी थी, उन में कोई भी इजाफा नहीं हुआ और इंसान ने अपने बाहुबल से, अपने दिमाग से जंगली हिंसक जानवरों को साथी बनाकर, आसमान में उड़ने वाले पक्षियों से साझेदारी करके धरती के नक़्शे को ही बदल दिया है ! तभी तो स्वर्गके देवता भी धरती पर वेश बदल बदल कर पिकनिक मनाने समय समय पर आते रहते हैं ! लेकिन जब मैं पिछली बार धरती पर गया था तब तो शानदार महल, भवन, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च, नदियों में भारी भरकम पुल, जंगल काट कर खेती, और कही चमत्कारी काम तो किये थे लेकिन इस प्रकार के धरती से स्वर्ग को मिलाने वाला यान पहली बार देखने को मिला ! यान में कैमरे लगे थे और वे स्वचालित थे ! फोटो खिची जा रही थी और सामने वाले स्क्रीन पर वह नजर आ रही थी और धरती पर भेजी जा रही थी ! वह यान एक महीने के अभियान पर अंतरिक्ष की सीमा में रहा और फिर जाकर धरती पर अमेरिका के नासा वेधशाला में जाकर उतर गया, नारद जी वहीं विना किसी को नजर आए विमान से उतरे और उनकी छाया इण्डिया आने वाले इयर लाइन में सवार हो गयी ! अब नारद जी दिल्ली के इन्द्रा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से बाहर निकले, दिल्ली बदली बदली लग रही थी ! मेट्रो ट्रेन इयर पोर्ट से कनाट प्लेस केवल १७ मिनट में पहुँच गयी ! वे जय जवान ज्योति स्थल पर गए, २ मिनट तक शहीदों की आत्माओं की शांती के लिए प्रार्थना की और चले राष्ट्रपति भवन की ऑर ! अभी तक वे अपना सफ़र अदृश्य होकर ही कर रहे थे ! (तीसरा भाग जारी)
शनिवार, 2 जुलाई 2011
नारद जी फिर धरती पर आए
रविवार, 15 मई 2011
एक बार फिर खबरों के जंगल में
इसके बाद आई एक और खबर की ग्रेटर नोयडा को और आकर्षक बनाने के लिए गौतम बुध नगर के भत्ता गाँव की जमीन को उतर प्रदेश सरकार ओने पौने दामों में लेकर बिल्डरों को मंहगे दामों में बेच रही है ! इससे गाँव के किसान भड़क गए और उनहोंने सरकार द्वारा जबरदस्ती अपनी जमीन के अधिग्रहण के खिलाफ आवाज उठानी शुरू करदी ! सरकार ने पुलिस फ़ोर्स का भी इस्तेमाल किया ! इससे समस्या और उलझ गयी ! कुछ किसान मरे कुछ घायल हुए, मामला कोर्ट में गया, कोर्ट ने भी किसानों के हक़ में फैसला दिया ! अब राजनीति के दिग्गज इस अग्नि में अपनी अपनी रोटी सकने वहां किसानों के जख्मों को कुरेदने के लिए जा रहे हैं ! कभी राहुल गांधी अपने लश्कर के साथ जा रहा है तो कभी भा ज पा के शीर्ष नेता, या फिर नेताओं का बोझ - थैला उठाने वाले आया राम गया राम भी अपनी हाजिरी देने पहुँच रहे हैं बड़ी संख्या में !
ऐ पी एल - क्रिकेट के मैदान से
ताजी खबर के मुताबिक - १५ तारीख के मैच में किंग्स एलेवन ने डेल्ही को हरा दिया २९ रनों से इस तरह वह प्वाईंट टेली में पांचवें पायदान पर आगई है ! वालथती ने फिर से अपनी ले ताल में आकर ६२ रन बटोरे और ४३८ रनों के अम्बार के सहारे फिर से पिंक कैप अपने सर पर रख ली ! दूसरे मैच में कोची ने राजस्थान को ८ विकेट से और मात्र ७.२ ओवरों में ९८ रन बनाकर मात देदी !
इस समय प्रथम है रोयल चैलेंजर्स बंगलौर, दूसरे नंबर पर चेन्नई, तीसरे पर मुंबई इंडिया और चौथे पर नाईट राईडर कलकता ! आजतक सबसे ज्यादा ३२ छक्का जमाने वाला क्रिस गेल है और अभी तक सर्वाधिक चौके ५२ अभी तक वालथती के नाम हैं ! अभी तक के मैचों में सव्राधिक ७३ छक्के जमाने वाली टीम दिल्ली है ! अभी और भी है देखते जाइए ब्लॉग को !