रविवार, 3 जुलाई 2011

नारद जी फिर धरती पर आये द्वितीय भाग

नारद जी देवेन्द्र से बातें कर ही रहे थे की समाचार मिला की धरती से एक चिंगारी बड़ी वेग से आकाश गंगा की तरफ आ रही है, इसमें बाहरी तापमान को समावेश करने की क्षमता वाला पीछे एक रेल डिब्बे जैसा बॉक्स सलग्न है जिसमें दो बन्दर बंद हैं ! धरती वाले उसे अन्तरिक्ष यान से जानते हैं ! वह पहले चंद्रमा की कक्षा में मंडराता रहा फिर सीधे मंगल ग्रह की कक्षा में पहुँच गया ! नारद जी ने सोचा चलो चल कर देखते हैं अपनी योग शक्ती के बल पर इसी यान के अन्दर प्रवेश कर देना चाहिए ! उनहोंने योग बल का प्रयोग किया और पहुँच गए मानव निर्मित अन्तरिक्ष यान के अन्दर ! वाह क्या आराम दायक वातानुकूल सभी सुख सुविधाओं से सुसज्जित, नारद जी धरती के मानवों द्वारा निर्मित की गयी इस नायाब वायुयान से बड़े प्रभावित हुए साथ ही उन्हें बड़ा आश्चर्य भी हुआ की इंसान तो जन्मता है और ज्यादा से ज्यादा ९० - १०० सालों के अन्दर इस संसार से कूच कर देता है कुछ तो अपने जवानी के प्रथम सीढी पर कदम रखने से पहले ही धरती छोड़नी पड़ती है फिर ये लोग कब इतना बड़ा काम कर देते हैं ! हजारों रोगों से रोग ग्रस्त रहतेहैं, पूरे परिवार के पालन पोषण की चिंता अलग फिर भी कुदरत से टकर
लेकर कुदरत को ही बदल देते हैं ! देवता तो अजर अमर होने के बाद भी जो सम्पति उन्हें विरासत में मिली है उसी को भी संभाल कर नहीं रख पा रहे हैं और जो भोग विलास की वस्तुवें स्वर्ग लोक निर्माण के समय देवताओं को दी गयी थी, उन में कोई भी इजाफा नहीं हुआ और इंसान ने अपने बाहुबल से, अपने दिमाग से जंगली हिंसक जानवरों को साथी बनाकर, आसमान में उड़ने वाले पक्षियों से साझेदारी करके धरती के नक़्शे को ही बदल दिया है ! तभी तो स्वर्गके देवता भी धरती पर वेश बदल बदल कर पिकनिक मनाने समय समय पर आते रहते हैं ! लेकिन जब मैं पिछली बार धरती पर गया था तब तो शानदार महल, भवन, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च, नदियों में भारी भरकम पुल, जंगल काट कर खेती, और कही चमत्कारी काम तो किये थे लेकिन इस प्रकार के धरती से स्वर्ग को मिलाने वाला यान पहली बार देखने को मिला ! यान में कैमरे लगे थे और वे स्वचालित थे ! फोटो खिची जा रही थी और सामने वाले स्क्रीन पर वह नजर आ रही थी और धरती पर भेजी जा रही थी ! वह यान एक महीने के अभियान पर अंतरिक्ष की सीमा में रहा और फिर जाकर धरती पर अमेरिका के नासा वेधशाला में जाकर उतर गया, नारद जी वहीं विना किसी को नजर आए विमान से उतरे और उनकी छाया इण्डिया आने वाले इयर लाइन में सवार हो गयी ! अब नारद जी दिल्ली के इन्द्रा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से बाहर निकले, दिल्ली बदली बदली लग रही थी ! मेट्रो ट्रेन इयर पोर्ट से कनाट प्लेस केवल १७ मिनट में पहुँच गयी ! वे जय जवान ज्योति स्थल पर गए, २ मिनट तक शहीदों की आत्माओं की शांती के लिए प्रार्थना की और चले राष्ट्रपति भवन की ऑर ! अभी तक वे अपना सफ़र अदृश्य होकर ही कर रहे थे ! (तीसरा भाग जारी)

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