दो हजार नौ में मेरा गढ़वाल जाने का चक्कर लगता रहा ! इस बीच मैं ढून्ढूभी नामक साप्ताहिक पत्रिका से जुड़ गया ! मेरे ममेरे भाई स्वर्गीय श्री भूपेन्द्रसिंह जी ने "ठहरो" नामक साप्ताहिक पेपर निकाला था ! जब तक वे रहे नियमित तौर पर यह पेपर चलता रहा ! उनके बाद इस पेपर की बागडोर इनके सुपुत्र सुधीन्द्र नेगी ने संभाली ! अब इस का नाम ठहरो से ढून्ढूभी रख दिया गया है ! यह साप्ताहिकी ज्यादातर जंगल और प्रयावरण से समबन्ध रखने वाले लेख, कवितायेँ, सस्मरण को ही ज्यादा तबजो देती है ! इन्हीं दिनों इस पेपर के माध्यम से सुधीन्द्र नेगी ने एक स्मारिका निकाली और उसके विमोचन के शुभ अवसर पर मैं और मेरा बेटा ब्रिजेश भी वहां झिन्डी चौड़ में मौजूद थे ! स्मारिका का विमोचन श्री रावत जी (चीफ कन्सर्वेटर) के कर कमलों से संमापन हुआ ! इस समारोह में बहुत सारे पुराने नए लोगों से भी मुलाक़ात हुई !
काफी सालों बाद मैंने दिल्ली में १५ अगस्त, दिवाली, दशहेरा परिवार के साथ मनाया ! आम खूब खाए और मकई वह भी ताजी ताजी भूनी हुई का स्वाद लिया ! झिन्डी चौड़ जहाँ सन १९५४ तक बिलकुल जंगल था और गढ़वाल के उन लोगों को जिनके पास जमीन नहीं थी उन्हें यह जमीन बांटी गयी थी प्रांतीय सरकार की ओर से ! उन दिनों मेरे मामा गोकुलसिंह जी अपने परिवार के साथ यहाँ जंगल में आये थे ! और आज मामा जी की तीसरी पीढी (सुधीन्द्र मेरे मामा जी के पौते हैं ) उनकी धरोहर की देख भाल कर रहे है ! सुधीन्द्र ने अपने बड़े बेटे जो इस समय गढ़वाल राईफल्स में सेवारत है की शादी कर ली है और मैं और ब्रिजेश इस शादी में सामिल हुए थे ! दादा लोगों ने
परेशानियां उठाई, मेहनत की और आज उनके नाती पोते उनकी मेहनत के फलों का स्वाद ले रहे हैं !
अब के मैं और मेरी पत्नी जून की १४ तारीख को ब्रिटिश इयर वेज से लन्दन होते हुए अमेरिका पहुंचे ! इन दिनों यहाँ का मौसम बड़ा ही सुहावन रहता है ! मई से सितम्बर तक वारीश भी होती है, हवाएं भी चलती हैं, कभी धूप कभी छाँव ! फिर सितम्बर सम्माप्त होने और अक्टूबर आते ही मौसम भी करवट बदलने लगता है ! राजेश के बहुत सारे ऐ ऐ टी के दोस्त यहाँ पर हैं, कुछ १०-१५ मील पर हैं कुछ ३०-४० मील के दायरे हैं और ये सभी लोग दो हफ्ते या महीने में एक बार जरूर मिल लेते हैं ! मकान सभी के अपने हैं जहाँ सारी सुविधाएं जैसे, पार्क, बच्चों के खेल, स्विमिंग पूल, टेनिस कोर्ट मौजूद हैं ! सर्दियों में स्वीमिंग पूल बंद हो जाते हैं लेकिन लोग अपने बच्चों को ३०-४० मील दूर स्वीमिंग कोचिंग के लिए ले जाते हैं ! यहाँ भी काम हफ्ते में पांच ही दिन चलता है और बाकी दो दिन बच्चों के मनोरंजन के लिए होते हैं ! इस तरह यहाँ की जिन्दगी चलती फिरती रहती है कभी आराम नहीं करती, यही इस कंट्री की विकास की कहानी है ! हर कोई आज के लिए जीता है और खुश रहता है ! कोई जमा नहीं चोरी नहीं, न काला धन ! अपना धन अपने देश में ! न काम चोरी न टैक्स चोरी ! जनता का पैसा जनता पर ही खर्च किया जाता है ! जो जिस विभाग का मंत्री उस विभाग की डिग्री है उस के पास ! चोरी हेरा फेरी यहाँ भी होती है पर ५% बाकी ९५% काम होता है ! यही कारण है की अमेरिका की खोज कोलंबस ने १४९२ ई० में की वह भी इंडिया समझ कर, उस समय यहाँ के लोग बिलकुल जंगली हालत में थे ! पैदावार के नाम केवल एक फसल मकई (भुट्टा) यहाँ पैदा होती थी ! हथियार के नाम इनके पास धनुष बाण, लोहे का गंडासा, छुरी, चाकू होते थे और इन्ही से ये लोग जंगली भैंसे, जंगली बकरे, खरगोस, हिरन का शिकार करते थे ! अलग अलग कबिले अलग अलग नामों से गाँव बसाकर रहते थे ! एक कबीला दूसरे कबीले के ऊपर अटैक करके मारकाट करके धन और जवान औरतों को लूट कर ले जाते थे ! कपड़ों के नाम से जंगली जानवरों की खाल बदन पर लपेटे रहते थे ! यहाँ के लेखक, उपन्यासकार, इतिहासकार इन जन जातियों को इन्डियन कहते हैं ! जब की भारत देश जब सिकंदर ने ३२५ ई० पू० पोरस पर अटैक किया था यहाँ के लोग कपडे पहिनते थे, अच्छे हथियार रखते थे और कही किस्म की खेती करते थे ! उस समय शिक्षा के लिहाज से भारत में दो विश्व विद्यालय थे, नालंदा और तक्षशिला जहां विश्व भर के विद्यार्थी विद्याध्यन के लिए आते थे ! हाँ जन जातियां ठीक अमेरिका में रहने वाले गाँवों में रहने वाली जन जातियों की तरह ही रहते थे ! १८१०-१५ तक अमेरिका के उत्तर-पश्चिम पर्वतीय इलाके बहुत पिछड़े थे और आज पूरा अमेरिका विश्व का नंबर वन स्थान पर है ! और हमारा भारत .....!
मेरे छोटे बेटे ब्रिजेश ने कोटद्वार में पाईन नीडल (चीड की पती वनाम पिरूल) से फायर ब्रिक्स बनाने की एक छोटी सी फैक्टरी लगा रखी है ! ये फायर ब्रिक्स कोयले की जगह ले रहा है ! ये पिरूल गर्मी शुरू होते ही गिरना शुरू हो जाता है और मई जून के महीनों में जंगलों में आग लगने का कारण बनता है ! हर साल इससे लगने वाली आग से जंगलात का करोड़ों की सम्पति जल कर राख होती है ! विश्व में जहां भी चीड के जंगल हैं वे सभी देश इसकी पत्तियों से परेशान हैं ! वातावरण में बढ़ते हुए प्रदूषण पर ये फायर ब्रिक्स अंकुश लगाने में सक्षम है ! प्रदूषण एक विश्व की समस्या है और जो भी संस्था, देश इस प्रदूषण पर कंट्रोल करने में सहयोग कर रहा है विश्व के बहुत से देश उस संस्थान और उस फैक्टरी में दिल चस्पी ले रहे है ! कोटद्वार में इसको देखने के लिए अभी तक स्वीटजर लैंड और जर्मनी के पत्रकार और टेलीविजन के लोग यहाँ आ चुके हैं ! इन्हीं दिनों ऐ ऐ एम अहमदाबाद ने नए नए उद्योग धंधों से जुड़े लोगों को इस इंस्टीच्यूट में बेसिक प्रशिक्षण देने के लिए निमंत्रित किया था ! सोलह हजार लोगों ने अप्लाई किया, जिसमें ६० लोग प्रशिक्षण के लिए चुने गए, जिसमें ब्रिजेश भी एक था ! इन ६० लोगों को ऐ ऐ एम अहमदाबाद ने १० अक्टूबर से २० अक्टूबर २०१० तक प्रशिक्षित किया ! २०अक्तूबर 2010 को भी कुछ लोग गढ़वाल भ्रमण को आए हैं और उनका पूरा भ्रमण का प्रोग्राम ब्रिजेश ने ही तैयार किया है जिसमें हमारी फैक्टरी भी सामिल है !
सोमवार, 18 अक्टूबर 2010
बुधवार, 13 अक्टूबर 2010
क्रिकेट / कामनवेल्थ 2010
आज इंडिया ने आस्ट्रलिया के खिलाफ दूसरा मैच भी ७ विकेट से जीत लिया है ! पोपोरे मैच में सचीन ही छाया रहा ! पहली पारी में २१४ रन (४९ वां टेस्ट शतक ) और दूसरी पारी में ५३ रन (नौट आउट ), मैंन आफ दी मैच एंड मैंन आफ दी सीरिज ) ! पहले टेस्ट में ९८ और ३८ ! इस तरह सचीन के छ डब्बल शतक, (एक डब्बल शतक वन डे में २०० रन) १४२४० रन (१७१ मैच) जहां शायद ही कोइ पहुँच पाए ! मुरली विजय ने सचीन का अच्छा साथ दिया, उसने दूसरे टेस्ट में गौतम गंभीर की जगह खेला और पहली पारी में १३९ रन और दूसरी पारी में ३७ रन बनाए (गौतम और द्राविड से से बेहतर) ! पुजारा जो लक्ष्मण (जिसने पहले टेस्ट में दूसरी पारी में ७७ रन (नावाद) बनाकर टेस्ट जिताया, ० उसके स्थान पर खेलने आया और पहली पारी में ४ और दूसरी पारी में ७२ रन बनाकर भारत को जीत दिलाने में अहम् भूमिका निभाई ! सहवाग ३०+७, द्राविड ०+२१(नावाद), धोनी ३० कोइ ख़ास नहीं कर पाए ! हरभजन और ओझा ने छ छ विकेट लिए, जहीर खान ने चार, श्रीसंत ने २ और रैना ने एक विकेट लिया ! रैना ने ३२ रन बनाए और रैना और धोनी को दूसरी पारी खेलने की जरूरत ही नहीं पडी ! भारत आज भी टेस्ट सीरीज के प्रथम पायदान पर टिका हुआ है ! राजपाल की अगुवाई में भारतीय हॉकी टीम भी निखारने लगी है, उसने पहले पाकिस्तान को ७ - ४ से हराकर सेमी फाईनल में जगह बनाई, फिर इंग्लैण्ड को ५ - ४ से हराकर फाइनल में जगह बनाई है कामन वेल्थ गेमों में ! १४/10/२०१० तकभारत ३८ गोल्ड, 27 सिल्वर 36 ब्रोंज मैडल लेकर 101 मैडल जीत चूका है ! इंग्लैण्ड ३७ गोल्ड के साथ 59 सिल्वर और 46 ब्रोंज के साथ 142 ले चुका है !
आस्ट्रेलिया 74 गोल्ड, 55 सिल्वर और 48 ब्रोंज के साथ 177 मैडल लेकर प्रथम स्थान पर डटा हुआ है !
कामनवेल्थ गेम सफता पूर्वक समाप्त हो गए हैं ! इसकी सफलता का श्रेय सेना को जाता है जहाँ केंद्र तथा दिल्ली की शीला दीक्षित की सरकार असफल रही वहीं केवल पांच दिन के अन्दर भारतीय सेना ने पूरी मेहनत और ईमानदारी से इस कार्य को संपन किया !
आस्ट्रेलिया 74 गोल्ड, 55 सिल्वर और 48 ब्रोंज के साथ 177 मैडल लेकर प्रथम स्थान पर डटा हुआ है !
कामनवेल्थ गेम सफता पूर्वक समाप्त हो गए हैं ! इसकी सफलता का श्रेय सेना को जाता है जहाँ केंद्र तथा दिल्ली की शीला दीक्षित की सरकार असफल रही वहीं केवल पांच दिन के अन्दर भारतीय सेना ने पूरी मेहनत और ईमानदारी से इस कार्य को संपन किया !
रविवार, 10 अक्टूबर 2010
मौसम बदल रहा है
यहाँ अमेरिका में मौसम भी आँख मिचौनी का खेल खेल रहा है ! पिछले २८ सितम्बर से आज १० अक्टूबर तक पूरे ११ दिन तक आसमान या तो घने काले बादलों से ढका रहा या फिर कभी जोर की कभी हल्की हल्की बुँदे बारीश की पड़ती रही ! कल शनिवार था और आज रविवार दोनों दिन सूरज अपनी पूरी चमक दमक के साथ अहसास कराता रहा की अभी घबराने की कोई बात नहीं है सर्दी चंद कदम दूर है ! पेड़ पौधे रंग बदलने लगे हैं, पहले सुनहरे लाल, फिर पीले, और फिर सुख कर पतझर ! कभी आसमान में बादल रहते हुए भी लगता है की सर्दी नाम की कोई चीज अभी कोसों दूर है और अगली दिन आसमान बिलकुल साफ़ लेकिन ठंडी हवाएं अंगुलियाँ टेढ़ी हो जाती हैं ! पर मौसम कितना भी खराब क्यों न हो, आसमान में जहाज उड़ेंगे ही, सडकों पर कार, ट्रक्स बसें चलेंगी ही, सिटी जाने के लिए लोगों को १०० मील कार से सर्विस करने जाना ही है ! इसके अलावा बहुत सारे पानी से समबन्ध रखने वाले गेम्स अब बंद हो चुके हैं ! और इन एजेंसियों की दुकान बंद होने से यहाँ काम करने वाले एक तरह से बेकार हो गए हैं ! समुद्र में कहीं कहीं जहां वर्फ जम जाती है वहां बोटिंग बंद हो गयी है ! फूल धीरे धीरे अपनी पंखुड़ियां एक एक करके हवा के झोंको में उड़ने के लिए छोड़ती जा रही हैं ! पेड़ भी भारी मन से अपने प्यारे पतों को जुदा करने लग गए हैं ! "पता टूटा डाल से पवन ले गयी उडाय, अब के बिछुड़े कब मिले दूर पड़े हैं जाय "! बच्चों के बहुत से खेल बंद हो गए हैं, लेकिन उनके मनोंरंजन के लिए अभी भी बहुत कुछ बाकी है ! स्विम्मिंग पूल जहां पानी का टेम्प्रेचर नहाने लायक रखा जाता है, बच्चों के लिए सर्दियों में भी खुला रहता है ! ऐडवेंचर लैंड जहाँ बच्चों के मनोरंजन की बहुत सारी सामग्री है बारह महीने खुली रहती हैं ! आज फिर आसमान बिलकुल साफ़ है और सूरज की ताप बहुत सुख दायक लग रही है ! अगले कुछ घंटों में क्या होगा कहा नहीं जाता !
कामनवेल्थ गेम 2010
आज १० अक्टूबर भारत में शाम हो चुकी है, मेडल लिस्ट आस्ट्रेलिया पहले स्थान पर है ६१ गोल्ड, ३६, सिल्वर और ३७ तांबा, भारत की उपलब्धी २९ गोल्ड, २२ सिल्वर और २२, ताम्बा, दूसरे स्थान पर है। इंग्लैण्ड बड़ी तेजी से नजदीक आ रहा है २६ गोल्ड, ४५ सिल्वर और ३० ताम्बा कुल भारत के ७३ के मुकाबले १०१ ! कनाडा भी रेस में सामिल है २२ गोल्ड, १२ सिल्वर और २५ ताम्बा लेकर ! आज खेल का सात दिन पूरे हो चुके हैं ! आज का मजेदार समाचार की भारत ने हॉकी में पाकिस्तान को ७-४ से रौंद कर सेमीफाईनल में जगह बना ली है ! सोमदेव वर्मन ने भारत को टेनिस में २९ वां गोल्ड मेडल दिलवाया !
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