बुधवार, 29 सितंबर 2010

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कामनवेल्थ गेम्स
जी हाँ इस साल भारत कामन वेल्थ गेम्स दिल्ली में करवाने की जिम्मेदारी ले चुका है ! मंत्री, संतरी, नेता, नौकरशाह सभी भागते ही नजर आ रहे हैं ! शोर तो एक साल पहले से मचा था की इस वर्ष कामनवेल्थ गेम भारत में होंगे ! सरकार ने काफे बड़ी राशि इस गेम के लिए रिजर्व कर ली गयी थी, चेयर मैन बने सुरेश कलमाडी ! देख रेख की जिम्मेदारी थी दिल्ली के मुख्य मंत्री शीला दीक्षित की ! अगस्त तक पूरा पैसा जो गेम्स के लिए रिजर्व था पता ही नहीं चला कहाँ गया लेकिन काम ज़मीन पर कुछ भी नहीं हुआ ! नेताओं ने नौकरशाहों ने बड़े बड़े ठेके अपने नाते रिश्तेदारों को दे दिए ! प्रबंधकों की आँखे तब खुली जब जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम के पास बनने वाला पुल धरधराता हुआ नीचे आ गया ! उधर औडिटर जनरल ने गेम पर लगाए गए पूरी व्यवस्था पर ही सवालिया चिन्ह लगा दिया ! हर खरीदारी में करोंडो का हेर फेर औडिट में नजर आया ! जनता की खून पशीने की कमाई पर जिसका जहां दाव लगा वहीं डकार गए ! ऐडवरटाईजिंग कम्पनियाँ इन खेलों से किनारा करने लगे ! फिर दिल्ली सरकार की नींद खुली ! उन्होंने आनन् फानन में मार्केट में बिकनी वाली हर वास्तु पर तकस बढ़ा दिया गया, नतीजा महंगाई ! जब सिविल कामनवेल्थ गेम्स की तैयारी करने में बिलकुल असमर्थ हो गयी तो सेना की मदद
लेनी पडी ! गेम शुरू होने के एक हफ्ते पहले सेना को यह काम सौंपा गया और अब गेम तीन अक्टूबर को होने जा रहे हैं इसका पूरा श्रेय भारतीय स्थल सेना को जाता है ! भारत की इज्जत विश्व स्तर पर गिराने में सुरेश कलमाडी और उसकी फ़ोर्स ने कोई कमी नहीं छोडी थी लेकिन सेना ने ऐन वक्त पर पूरी जिम्मेवारी लेकर भारत की इज्जत बचा दी !
राम जन्म भूमि का विवाद
३० सितम्बर 2010 का दिन भारतीय इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा ! इस दिन इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने अयोध्या राम जन्म भूमि पर अपना फैसला सुना कर पिछले ६० सालों से चले आ रहे विवाद को समाप्त कर दिया ! रामजन्म भूमि पर १५२८ ई० में बाबर राम मंदिर को तोड़ कर बाबरी मसजिद बनवाई थी ! १९५० से यह केश कोर्ट में पेंडिंग पड़ा था ! कोर्ट के फैसले के मुताबिक़ विवाद वाली जगह मंदिर की है और राम जन्म भूमि न्यास को सौंप दी गयी है ! सीता की रसोई वाली जगह निर्मोही अखाड़ा को और तीसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया गया है ! कोर्ट के फैसले के बाद कोई अप्रिय घटना न हो इसके लिए प्रदेश और केंद्र सरकार ने सुरक्षा के पूरे प्रबंध कर रखे थे ! संतो ने अयोध्या राम जन्म भूमि को तीन भागों में बांटने के कोर्ट के फैसले के खिलाफ भारत बंद का ऐलान किया है ! शायद ही अमन पसंद लोगों को इस तरह के बंद करने और साम्प्रदायक झगणों को तूल देकर नयी समस्या खडी करने पर विष्वास होगा ! संतों का क्या है आश्रमों में हजारों लाखों इनके चेले और भक्त इन्हें चढ़ाव ही इतना चढ़ा देते हैं की इन्हें कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ती ! इन्हें कौन सा किसान सैनिक मजदूर की तरह काम करना है, कौन सा स्वामी रामदेव जी की तरह लाखों करोड़ों लोगों को योगा सिखा कर उन्हें निरोगी बनाना है, या दवाइयां बनाकर गरीब लोगों तक पहुंचाना है ! हाँ देश में संतों की एक बड़ी जमात है जो कहते कुछ हैं करते कुछ हैं ! बहुत से विश्व विख्यात संतों के तो करोड़ों का बिजनिस चलता है अपने नाम पर नहीं केवल ए से प्रोफिट की राशि के लिए जो हर हफ्ते/महीने पिछले दरवाजे से इनके आश्रम में पहुँच जाती है ! फिर भला संध्या, ध्यान, पूजा, भजन कीर्तन चाबीसों घंटे तो किए नहीं जा सकते, तो जो बाकी समय बीतता है दुनिया को दिखाने के लिए की हमारी भी एक जमात है, हमारी भी एक अलग पहिचान है, बन्ध करेंगे, रैली निकलेगी संतों की, सड़क पर जाम लग रहा है लगने दो, कोई बीमार समय पर हॉस्पिटल नहीं पहुँच पाने से दम तोड़ रहा है तोड़ने दो, इन संतों ने जो ठान ली है वह करना है ! अब अगर कोई भी संगठन इस कोर्ट के आदेश पर ऐतराज करता है जनता को उसका वहिष्कार कर देना चाहिए ! इससे अच्छा फैसला इस केश पे हो ही नहीं सकता था ! हर अमन पसंद देश के नागरिक को इस फैसले पर अपनी खुशी जाहिर करनी चाहिए !
इन्डियन आइल कोर्पोरेशन के चेयर मैन
पहली वार उत्तराखंड के श्री रणवीरसिंह बुटोला जी को इंडियन आइल कोर्पोरेशन का चेयर मैन बनाया गया है ! इंग्लिस न्यूज पेपर 'हिन्दू' तथा अन्य समाचार पत्रों के माध्यम से यह खबर बिजिनेस कालम के अंतर्गत ३० सितम्बर २०१० को छपी है ! श्री बुटोला जी का जन्म ०५ मई १९५४ को हुआ था ! एम बी ए करने के बाद उनहोंने फरवरी १९९१ ई0 ओ एन जी सी ज्वाइन किया डिपुटी जरनल मैनेजर की हसियत से ! १५/११/२००२ को उनकी योग्यता और आदर्श उनको ओ एन जी सी के डारेक्टर की पोस्ट तक पहुंचा गए ! १३/०५/२००४ ई० को उन्हें ओ एन जी सी का मैनेजिंग डारेक्टर बनाया गया ! ३० सितम्बर २०१० को उन्हें ६ प्रत्यासियों में से चुन कर ऐ ओ सी का चेयर मैन बनाया गया !
भारत पाकिस्तान मसला
भारत ने हमेशा से पाकिस्तान की तरफ दोस्ती का हाथ बढाया लेकिन उसने बदले में आतंकवादियों को ट्रेंड करके हमारे शहरों कस्बों में भेज कर मार काट की, साम्प्रदायक दंगे करवाए, काश्मीर घाटी में बार बार आतंकी हमला करवाए ! एक तरफ पाकिस्तान कहता फिरता है की हम भारत के साथ शांती वार्ता के लिए तैयार हैं और दूसरी तरफ पाकिस्तान में पल रहे आतंकियों को काबू नहीं कर पा रहा है ! वहां चाहे फ़ौजी तानाशाह शासक हो या कोई सिविलियन आतंकवाद पर काबू पाना इनके बस की बात नहीं है ! अमेरिका खूब जानता है लेकिन फिर भी पाकिस्तान को सैनिक साज सामान के साथ आर्थिक मदद भी देता जा रहा है ! बार बार सुरक्षा परिषद् तथा संयुक्त राष्ट्र संघ में काश्मीर के मसले को उठाकर पाकिस्तान समस्या को सुलझाने के वजाय उलझाता जा रहा है ! फिर पाकिस्तान के साथ शांती वार्ता कैसे शुरू हो, यह्सवाल १९४८ से लेकर आज तक ज्यों का त्यों बिना किसी उत्तर के लटका हुआ है ! आगे आगे देखो होता होता क्या ?

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