बुधवार, 29 सितंबर 2010

जादूगर चूहा

नदी के किनारे एक पेड़ से हट कर एक बिल बनाकर एक चूहा रहता था ! वह सुबह ही अपनी पेट पूजाके लिए अपने बिल से निकल पड़ता था, चील, कौवे, बिल्ली, कुते, सांप और अन्य दुश्मनों से बचता बचाता जो कुछ भी भी मिल जाता खाता और वापिस अपने बिल में लौट आता ! कभी कभी तो खाली पेट ही लौट आता फिर भी भगवान् को मनाना "हे ईश्वर खाली पेट ही सही, सही सलामत तो लौट आया" ! गुजर रही थी और वह अपने में खुश था ! लेकिन उसकी खुशी ज्यादा दिन तक नहीं रही ! एक दिन सुबह सुबह वह अपने बिल से निकल रहा था की क्या देखता की पेड़ की जड़ में जो बिल है उसमें एक काला सांप घुस रहा है ! अब रात दिन वह सांप के भय से ग्रस्त रहने लगा !
और एक दिन वह सुबह सुबह अपने बिल से जल्दी ही निकल गया ! चलते चलते दुश्मनों से अपने को बचाते हुए वह नदी के किनारे किनारे वहां पहुँच गया जहां बालू ही बालू था ! वह कुछ देर उस बालू में उछलता कूदता रहा और मस्त हो कर अपने आज का भरपूर आनंद लेता रहा, यह सोच कर की पता नहीं अगले पल उसके साथ क्या होने वाला है ! फिर अचानक एक अचम्भा हो गया ! उसे उस बालू में एक चमकता हुआ गोल मोल छोटा सा लाल पत्थर नजर आ गया ! उसने उस पत्थर को अपने मुंह में दबाया और बड़ी मस्ती से खरामें खरामें अपने बिल की तरफ जाने लगा ! अब उसे किसी से भी कोई डर नहीं लग रहा था ! शरीर के अंदर एक विशेष प्रकार का आनंद उसे महसूस हो रहा था ! जैसे ही वह अपने बिल के पास पहुंचा उसे वही काला सांप नजर आया जैसे वह उस चूहे का ही इंतज़ार कर रहा हो ! आज वह चूहा उसे देख कर न डरा न उसे कोई घबराहट ही हुई ! अचानक उसके दिमाग ने सोचा, काश यह सांप गिलहरी बन जाता और सच मुच में वह सांप देखते ही देखते गिलहरी बन गया और भागता हुआ पेड़ पर चढ़ गया ! यह तो अचम्भा हो गया ! कमाल हो गया ! अभी तक वह जादुई लाल पत्थर उसके मुंह में ही था ! वह अब इतमिनान से अपने बिल में चला गया ! आज उसने पूरे दिन कुछ भी नहीं खाया था और इस चमकीले पत्थर के मिलने की खुशी में उसे लगा भी नहीं की वह भूखा है ! जब उसने पत्थर मुंह से नीचे रख दिया तो उसे भूख का आभास होने लगा ! उसने अपना दाहिना पंजा उस चमकीले पत्थर पर रखते हुए मन में सोचा 'काश' यहाँ पर मेरे लिए अन्दर सारा भोजन आ जाय, और वहां भोजन से उसका बिल भर गया ! अब उसने मन में सोचा की मेरा यह बिल एक सुन्दर घर जैसा बन जाय ! और देखते ही देखते बिल के अन्दर ही अन्दर चूहे का एक ख़ूबसूरत सा घर तैयार हो गया ! एक कमरा उसके सोने का, एक कमरा खाने का सामान रखने का, बाथ रोम और एक स्पेशल रोम जादुई चमकदार पत्थर के लिए ! दरवाजा काफी मजबूत था, जब चूहा चाहेगा तभी खुलेगा नहीं तो बंद ही रहेगा ! अब चूहे की जिन्दगी अन्य चूहों से बिलकुल भिन्न हो गयी थी ! अभी वह कुंवारा था ! अब एक सुन्दर सी चुहिया की तलाश में था ताकि शादी करके घर बसाए लेकिन जैसी दुलहन उसे चाहिए थी उसे मिली नहीं और उसने शादी का इरादा ही छोड़ दिया ! एक दिन उसके दिमाग में आया की 'आज कुछ और चमत्कार करके देखा जाय ' ! वह उस जादुई पत्थर को मुंह में दबाकर अपने दरवाजे पर बैठ गया ! सामने एक लोमड़ी आ रही थी ! चूहे को सामने देख कर उसके मुंह में पानी भर आया, वह धीरे धीरे उसको खाने की गरज से उसके नजदीक आने लगी, जब वह बहुत करीब आ गया तो चूहे ने दिमाग में सोचा, 'काश यह लोमड़ी एक छोटा मृग बन जाय और वह लोमड़ी सच मुच में एक छोटा मृग बन गया ! उसी समय उधर से एक भेड़िया आया और उस लोमड़ी बने मृग को मार कर खा गया ! अगले दिन वही भेड़िया उसके बिल के आगे से गुजर रहा था, उसकी भी नजर चूहे पर पड़ गयी, वह भी चूहे को मारने की नियत से जादूगर चूहे के नजदीक तक आ गया, फिर चूहे ने सोचा की 'काश यह भेड़िया खरगोश बन जाय और वह भेड़िया खरगोश बन गया, उसे उड़ते हुए एक चील पकड़ कर आसमान में ले जाकर खा गयी ! वैसे वह केवल हिंसक पशुवों को ही साकाहारी पशु में बदली करता था, लेकिन सारे जंगल में यह खबर आग तरह फ़ैल गयी की एक चूहा जादूगर बन गया है और वह जिसको भी चाहता है बदली कर देता है, सांप को गिलहरी, लोमड़ी को मृग, लक्कड़ बग्घे को नील गाय ! उसने तो एक मगर मच्छ को भी बदली करके मछली बना दिया है, एक जंगली कुते को जंगली बकरा बना दिया, आदि आदि ! चूहा अब घमंडी हो चला था, किसी को कुछ नहीं समझता था, जंगल के सारे छोटे बड़े जानवरों ने उसके घर के आगे से आना ही छोड़ दिया था ! यह खबर उड़ते उड़ते जंगल के राजा शेर के कानों में भी पड़ गयी ! शेर ने महसूस किया की सारे जंगल में एक अदना सा चूहे की ही बात हो रही है शेर की तो कोई बात ही नहीं करता ! चलो एक बार चल कर देखते हैं उस जादूगर चूहे के चमत्कार को ! मंत्री मंडल के कुछ सदस्यों ने शेर को चेताया भी की ये जादूगर चूहा छोटा मोटा जादूगर नहीं है बड़ा पहुंचा हुआ जादूगर है, इसे जितनी दूरी बना कर रखा जाय वही ठीक रहेगा, कहीं इसने अपना जादू हम पर आजमा दिया और हमें ही कुछ बना दिया फिर क्या होगा ! लेकिन शेर बहादुर और दिलेर था जादूगर की भभकियों से डरने वाला नहीं था ! वह अपने मंत्रियों के साथ चूहे के दरवाजे पर आ गया ! शेर को देखते ही चूहे की सांश रुक गयी, उसके दिमाग ने सोचना छोड़ दिया, उसे पता भी नहीं चला की घबराहट में उसके मुंह से कब वह चमत्कारी पत्थर निकल कर अचानक कहीं गायब हो गया ! वह बेहोश होगया, जब उसे होश आया, अपने को एक निर्बल असहाय चूहे के रूप में पाया, अब वह जान बचाने के लिए भागा भी लेकिन तब तक देर हो चुकी थी, एक बिल्ली जो काफी दिनों से उसकी तलाश में थी, ने उसे पकड़ कर उदर ग्रस्त कर दिया था ! फिर एक नयी खबर आग की तरह जंगल में फैल गयी की जादूगर चूहा परलोक सिधार गया है !

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